आज लिखी ये कविता
कल्प कल्प युगों में ये,
ये, जो अकल्पित घटता है
कौन है , जो आज तुम्हारे
कोप से बचा है
जो, मारे गये
क्या, वो नही तुम्हारे सखा है
हर पल बच्चों की तरह
बिलखा है
रोक लो तांडव
ये क्या अपने कपाल पर
वक्त के भाल पर लिखा है
हे शिव ,आपसे
ये मेरी इल्तजा है
सुन लीजिये प्रभु
कल्प कल्प युगों में ये,
ये, जो अकल्पित घटता है
कौन है , जो आज तुम्हारे
कोप से बचा है
जो, मारे गये
क्या, वो नही तुम्हारे सखा है
हर पल बच्चों की तरह
बिलखा है
रोक लो तांडव
ये क्या अपने कपाल पर
वक्त के भाल पर लिखा है
हे शिव ,आपसे
ये मेरी इल्तजा है
सुन लीजिये प्रभु
kavita ka last touch dene ka bhi vqt ynha nhi hota
ReplyDeletesmay ki sima h,