बचपन में आल्हा पढ़ी थी
कुछ पन्तियाँ है
आप भी देखे , हमारे देश का दर्शन है ये ....
सदा तुरैया न वन फूले , यारों सदा न सावन होय
सदा न माता , उर में जन्मे , यारों समय न बारम्बार
जैसे पात टूटी तरवर से , गिरी के बहुरि न बारम्बार
मानुष देहि, यह दुर्लभ है , ताते करो , सुयश के काम
कुछ पन्तियाँ है
आप भी देखे , हमारे देश का दर्शन है ये ....
सदा तुरैया न वन फूले , यारों सदा न सावन होय
सदा न माता , उर में जन्मे , यारों समय न बारम्बार
जैसे पात टूटी तरवर से , गिरी के बहुरि न बारम्बार
मानुष देहि, यह दुर्लभ है , ताते करो , सुयश के काम
gorakhpur ka alha, tha, jo bua ke ynha se layi thi
ReplyDeletevo, ekaek dimak chat gyi
ab, jo h, vo asli nhi
vo varanashi ki kyi kitab h
mai fir se vnhi, gorakhpur ki alha , dekh rahi hu